रिपोर्ट // वीरेन्द्र कुमार
करनैलगंज(गोण्डा)।नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र सिंह के दिशा निर्देशन में एन एस एस के कार्यक्रम अधिकारियों एवं छात्र छात्राओं की एक गोष्ठी की गई। जिसमें बैकुण्ठ नाथ महाविद्यालय के डॉ. संतोष मिश्र डॉ. संजय शुक्ल व डॉ. पुनीत सिंह सहित कई महाविद्यालय के कार्यक्रम अधिकारी व स्वयंसेवक मौजूद रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जितेंद्र सिंह व संचालन डॉ. अनिल त्रिपाठी ने किया। श्री सिंह ने बताया कि
ब्लड यानी खून एक ऐसी चीज है जिसे बनाया ही नहीं जा सकता। इसकी आपूर्ति का कोई और विकल्प भी नहीं है। यह इंसान के शरीर में स्वयं ही बनता है। कई बार मरीजों के शरीर में खून की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि उन्हें किसी और व्यक्ति से ब्लड लेने की आवश्यकता पड़ जाती है। ऐसी ही इमरजेंसी स्थिति में खून की आपूर्ति के लिए लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक करके, अनगिनत जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने के उद्देश्य से हर साल 14 जून को पूरे विश्व में 'रक्तदाता दिवस' मनाया जाता है। वर्ष 2004 में विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतरराष्ट्रीय रेडक्रॉस संघ व रेड क्रीसेंट समाज ने 14 जून को वार्षिक तौर पर इसे पहली बार मनाकर इसकी शुरुआत की थी। रक्तदान करने से कई पढ़े-लिखे लोग तक आज भी डरते हैं। रक्तदान से जुड़ीं कई भ्रांतियां समाज में मौजूद हैं।डॉ. संतोष मिश्र ने बताया कि रक्तदान से संबंधित गलतफहमियों को दूर करते हुए इसके फायदे जानें। एक औसत व्यक्ति के शरीर में 10 यूनिट यानी (5-6 लीटर) रक्त होता है।रक्तदान में केवल 1 यूनिट रक्त ही लिया जाता है। कई बार केवल एक कार एक्सीडेंट (दुर्घटना) में ही 100 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ जाती है। एक बार रक्तदान से आप 3 लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं। भारत में सिर्फ 7 प्रतिशत लोगों का ब्लड ग्रुप 'O नेगेटिव' है। 'O नेगेटिव' ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर कहलाता है, इसे किसी भी ब्लड ग्रुप के व्यक्ति को दिया जा सकता है।
इमरजेंसी के समय जैसे जब किसी नवजात बालक या अन्य को खून की आवश्यकता हो और उसका ब्लड ग्रुप ना पता हो तब उसे 'O नेगेटिव' ब्लड दिया जा सकता है।