बिहार - ऐतिहासिक नवपाषाण कालीन स्थल चिरांद में खुदाई के दौरान कुषाण काल के पु​रातात्विक अवशेष भी मिले

सहायक संपादक - के के गुप्ता

छपरा(बिहार) से महज 08 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में चिरांद एक महत्वपूर्ण पुरातत्व स्थल है।भारत में यह नव पाषाण काल(Neolithic Age or New Stone Age)का पहला ज्ञात स्थल है। यहाँ हुए खुदाई से यह पता चला है कि यह स्थान नव-पाषाण काल
 (२५००-१३४५ ईसा पूर्व) तथा ताम्र युग में आबाद था।खुदाई में यहाँ से हड्डियाँ, गेंहूँ की बालियाँ तथा पत्थर के औजार मिले हैं जिससे यह पता चलता है कि यहाँ के लोग लोग कृषि, पशुपालन एवं आखेट में संलग्न थे।बुर्ज़होम (कश्मीर) को छोड़कर भारत में अन्य किसी पुरातात्त्विक स्थल से इतनी अधिक मात्रा में नवपाषाणकालीन उपकरण नहीं मिले जितने कि चिरांद ग्राम से प्राप्त हुए हैं।स्थानीय लोग चिरांद टीलों को द्वापर युग के राजा मौर्यध्वज (मयूरध्वज) के किले का अवशेष एवं च्यवन ऋषि का आश्रम भी मानते हैं। यहाँ खुदाई में बुद्ध की मूर्तियाँ एवं धम्म से जुड़ी कई चीजें मिली है जिससे चिरांद के बौद्ध धर्म से लगाव का भी पता चलता है।
सन 1962-1963 में प्रो.बी.पी.सिन्हा द्वारा इस स्थल का उत्खनन करवाया गया। लेकिन 1969-70 के सत्र में यहां की गई खुदाई सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह उस कालखंड का पूर्वी भारत का एकमात्र स्थल है, जो गंगा के क्षेत्र में है।उत्खनन से पाँच प्रकार की संस्कृतियों के अवशेष मिले हैं।यह स्थल मैदानी क्षेत्र में गंगा, सोन, गंडक एवं घाघरा के संगम पर स्थित है।यहाँ जो उपकरण पाए गए हैं, वे हिरणों के सींगों से निर्मित हैं।मृद्भाण्डों पर चित्रांकन देखा गया है।मृत्पात्रों पर धान के भूसे के निशान तथा जले हुए चावल के दाने चिपके हुए प्राप्त हुए हैं।इससे पता चलता है कि चिरांदवासी चावल की खेती करते थे।बिहार के ऐतिहासिक नवपाषाण कालीन स्थल चिरांद में खुदाई के दौरान कुषाण काल के पु​रातात्विक अवशेष भी मिले हैं। कुषाण काल के अवशेष चिरान्द के मुख्य खुदाई स्थल से करीब एक किलोमीटर पूरब दफ्दरपुर गांव के समीप मिले हैं। प्राचीन समय की जमीन के अंदर अदभुत ईंटो से निर्मित लगभग 130 फीट लम्बी दीवार वहां स्थित है जिसके एक ईंट की लम्बाई 12 इंच तथा चौड़ाई 18 इंच है।
                 चिरांद के समीप दफ्फदरपुर में मिली संरचना के बारे में निदेशक पुरातत्व डा॰ अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि यह पहली शताब्दी की कुषाण काल की है। उन्होंने कहा कि इस तरह की संरचना का चिरांद के आस-पास लगतार मिलना यह दर्शाता है कि यहाँ एक बहुत बड़ा शहर तथा व्यापार केन्द्र रहा होगा। उन्होंने कहा की चिरांद में हुई पूर्व की खुदाई में भी आवासीय संरचना प्राप्त हुई थी। संभवतः यह पहली बार था कि उस आवासीय परिसर के अन्दर ही अटैच लैट्रीन-बाथरूम की संरचना थी। इससे यह पता चलता है कि उस समय के लोग स्वच्छता के प्रति कितने जागरूक थे।खुदाई में यहां मिट्टी के अतिप्राचीन बर्तन मिले जिसमें चावल के दाने लगे थे। इसके अलावा खुदाई में हड्डियां और पत्थर के औजार भी मिले हैं।
            हाल ही में वर्ष 2018-19 में पुरातत्व निदेशालय के दिशा-निर्देश में डेक्कन कॉलेज, पुणे की टीम ने यहाँ खुदाई की थी।स्थल पे देखरेख की थोड़ी कमी है पर भविष्य में बहुत सारी खोजों के साथ यह प्रकट होगा।
             इस जगह पे खड़ा होकर उस युग की कल्पना करना एक अलग आनंद देता है।आज बच्चों के साथ वहाँ जाकर एक गाइड के माफिक उस संस्कृति से उन्हें परिचय कराया जो कभी हमारे पूर्वज रहें होंगे।
             आइये बिहार में विहार कीजिये।

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