रिपोर्ट - वीरेन्द्र कुमार/
गोण्डा। आपने रामलीला के मंचन तो बहुत देखे होंगे, लेकिन गोंडा जिले के करनैलगंज में होने वाली रामलीला अपनी अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां दशहरे से एक दिन पूर्व अपराध और सजा पर आधारित फांसी का मंचन किया जाता है। इस अनोखी रामलीला को देखकर लोग अचंभित रह जाते हैं, क्योंकि इसमें अदालत, पुलिस और अपराधी – सभी की जीवंत भूमिका निभाई जाती है और आखिर में अपराधी को खुले मंच पर फांसी के फंदे पर लटका दिया जाता है।
अपराध और सजा का जीवंत चित्रण
करीब दो सौ साल पुरानी यह परंपरा ब्रिटिश शासन काल से चली आ रही है। एक माह तक चलने वाली रामलीला के दौरान दशहरे से एक दिन पहले अदालत और पुलिस की कार्रवाई का दृश्य दिखाया जाता है। कथा के अनुसार, दशहरे के मेले में काबुल का एक व्यापारी अपने बेटे के साथ व्यापार करने आता है। तभी एक अपराधी उसका सामान और नकदी लूटने का
प्रयास करता है। व्यापारी का बेटा विरोध करता है, जिस पर अपराधी उसकी हत्या कर देता है। व्यापारी थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराता है और पुलिस अपराधी को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश करती है। अदालत उसे मौत की सजा सुनाती है और खुले मैदान में लोगों के सामने अपराधी को फांसी दे दी जाती है।
समाज को संदेश देने की कोशिश
रामलीला कमेटी के कलाकारों द्वारा किया जाने वाला यह मंचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक माध्यम है। इसमें यह संदेश दिया जाता है कि चोरी, लूट या हत्या जैसे अपराध करने वालों को कानून और प्रशासन कठोर सजा देता है। फांसी का यह मंचन अपराधियों के लिए चेतावनी और आम जनता के लिए नसीहत बनकर सामने आता है।
देखने जुटती है भारी भीड़
करनैलगंज की इस ऐतिहासिक रामलीला को उत्तर प्रदेश की टॉप-5 रामलीलाओं में गिना जाता है। फांसी के मंचन को देखने के लिए आसपास के गांवों और कस्बों से हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं। पूरा मैदान खचाखच भर जाता है और लोग सांसें थामकर इस हैरतअंगेज दृश्य को देखते हैं।
करीब दो सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को आकर्षित करती है और समाज में कानून-व्यवस्था तथा अपराध पर नियंत्रण का संदेश देती है।